बिलासपुर में सियासी संग्राम तेज : शैलेष पांडेय का अमर अग्रवाल पर हमला, इस्तीफे की मांग— “विधानसभा में क्यों खामोश है शहर की आवाज़?”

बिलासपुर में सियासी संग्राम तेज : शैलेष पांडेय का अमर अग्रवाल पर हमला, इस्तीफे की मांग— “विधानसभा में क्यों खामोश है शहर की आवाज़?”

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। बुधवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने वर्तमान विधायक अमर अग्रवाल पर तीखा हमला बोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं विधानसभा में उठा रहे हैं, तो आखिर बिलासपुर की आवाज़ सदन में क्यों दबाई जा रही है?
प्रेसवार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी, नेता प्रतिपक्ष भरत कश्यप और उपनेता प्रतिपक्ष रामा बघेल सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में भाजपा सरकार और विधायक अमर अग्रवाल को जनहित के मुद्दों पर घेरते हुए उन्हें पूरी तरह असफल बताया।

ढाई साल में एक भी सवाल नहीं— पांडेय का बड़ा आरोप…

पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने विधानसभा रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया कि अमर अग्रवाल ने अपने कार्यकाल के पिछले ढाई वर्षों में एक भी प्रश्न नहीं पूछा। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में उनके नाम के सामने “0” दर्ज है, जो बिलासपुर की जनता के साथ अन्याय है। इसके विपरीत, शैलेष ने अपने पूर्व कार्यकाल में 392 प्रश्नों के माध्यम से शहर की समस्याएं उठाने का दावा किया।
पांडेय ने तीखे शब्दों में कहा कि “क्या मंत्री पद की चाहत में जनता के मुद्दों से समझौता कर लिया गया है?” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान विधायक जनहित के बजाय व्यक्तिगत राजनीतिक स्वार्थों को प्राथमिकता दे रहे हैं और सरकार के सामने झुककर बिलासपुर की आवाज को दबा रहे हैं।

23 साल का नेतृत्व, फिर भी समस्याओं का अंबार…

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ गठन के बाद लगभग 23 वर्षों तक बिलासपुर का नेतृत्व अमर अग्रवाल के हाथों में रहा, जिनमें 15 साल मंत्री पद पर भी रहे। इसके बावजूद शहर आज भी जलभराव, जर्जर सड़कें, पेयजल संकट, बिजली कटौती, बढ़ते अपराध, नशाखोरी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने लंबे कार्यकाल के बावजूद जवाबदेही कौन लेगा?

स्मार्ट सिटी पर सवाल—1100 करोड़ खर्च, फिर भी डूबा शहर…

कांग्रेस ने स्मार्ट सिटी परियोजना को भी कठघरे में खड़ा किया। शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने आरोप लगाया कि करीब 1100 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पहली ही बारिश में शहर जलमग्न हो गया। लोगों के घरों में पानी घुसा, जरूरी दस्तावेज, छात्रों की मार्कशीट और घरेलू सामान बर्बाद हो गए, लेकिन सरकार ने मात्र 6 हजार रुपये की सहायता देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
कांग्रेस ने इसे जनता के साथ अन्याय बताया और वास्तविक नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की।

संकट में गायब रहे विधायक…

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जलभराव-संकट के दौरान जहां कांग्रेस कार्यकर्ता राहत सामग्री और भोजन लेकर प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे, वहीं स्थानीय विधायक जनता के बीच नजर नहीं आए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि हर संकट में जनता के साथ खड़ा रहना और उनकी आवाज बनना है।

शहर की अन्य समस्याओं पर भी घेरा…

पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की बदहाल स्थिति, ट्रेनों की आवाजाही में कटौती, हवाई सेवाओं का अभाव, बढ़ी बिजली दरें, निजी स्कूलों की मनमानी फीस, स्वामी आत्मानंद स्कूलों की अव्यवस्था और बिगड़ती कानून व्यवस्था को सरकार और विधायक की विफलता बताया।
उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय की एलएलबी परीक्षा के पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

यह व्यक्ति नहीं, बिलासपुर के हक की लड़ाई…

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ अभियान नहीं, बल्कि बिलासपुर के अधिकार, विकास और जनता के हितों की लड़ाई है। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि जनसमस्याओं की अनदेखी जारी रही तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन को और तेज करेगी।

सम्पादक

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