सूचना आयोग में चयन प्रक्रिया के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर…
राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश…
बिलासपुर, 15 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में प्रावधानों का पालन नहीं करने का दावा करते हुए एक याचिका दायर की गई है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद जस्टिस पी पी साहू की बेंच ने शासन को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
राजनांदगांव निवासी प्रदीप शर्मा की ओर से अधिवक्ता अली असगर ने दायर याचिका में बताया है कि चयन प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जो पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती हैं। नियुक्ति मे सुप्रीम कोर्ट मे नमित शर्मा और अंजलि भारद्वाज केस मे दिए निर्देशों का पालन नहीं किया गया है हालांकि सुप्रीम कोर्ट भर्ती प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग कर रहा है।
याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ के मुख्य सूचना आयुक्त पद के उम्मीदवार का इंटरव्यू उनके अधीनस्थ, अतिरिक्त मुख्य सचिव गण एवं सर्च कमेटी के सदस्यों द्वारा लिया गया, जो प्रशासनिक दृष्टि से अनुचित है। जबकि तमिलनाडु और महाराष्ट्र तथा अन्य राज्यों मे रिटायर्ड हाईकोर्ट जज को सर्च कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि छत्तीसगढ़ में अध्यक्ष और सभी सदस्य ब्यूरोक्रेट्स थे।
इसके अलावा, संबंधित अधिकारी ने मुख्य सचिव पद पर रहते हुए ही मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए इंटरव्यू दिया, हालांकि इसके लिए विभागीय अनुमति और अवकाश लिया गया था।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2024 में दो उम्मीदवारों को सूचना आयुक्त पद के लिए पहले अयोग्य माना गया, लेकिन मात्र छह महीने के भीतर उन्हें योग्य घोषित कर सूचना आयोग में चयनित कर लिया गया। यह प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल करती है।
याचिका में कहा गया है कि चयन का आधार पारंपरिक अंक प्रणाली के बजाय ए, बी, सी ग्रेडिंग रखा गया, जिसमें अनुभव और इंटरव्यू के लिए कोई स्पष्ट मार्किंग टेबल नहीं था। इससे योग्य अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर नहीं मिल पाया।
शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर सुनवाई में उपस्थित हुए।
