प्रेस क्लब में “पहुना” बनकर पहुंचे आचार्य वाजपेयी…
“हिंदी को फिजी में खूब सम्मान मिला”

प्रेस क्लब में “पहुना” बनकर पहुंचे आचार्य वाजपेयी…“हिंदी को फिजी में खूब सम्मान मिला”

फिजी में आयोजित 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन में भारत के राष्ट्रीय प्रतिनिधि मंडल में शामिल आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने वहां से लौटकर बताया कि सम्मलेन में मुख्य रूप से हिंदी को वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करने का संकल्प पारित किया गया . उन्होंने बताया कि सम्मेलन का मूल विषय “हिंदी- पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम मेधा तक” रखा गया था . इसके अतिरिक्त सम्मेलन में वैश्विक संबंधों की स्थापना, भाषाई समन्वय, भारत की संस्कृति और विश्व-व्यापार में हिंदी के योगदान पर भी खुलकर विमर्श किया गया . आचार्य वाजपेयी मंगलवार को प्रेस क्लब के “पहुना” कार्यक्रम में पत्र-प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे थे .


बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य वाजपेयी ने आगे कहा कि हमारी भाषा हिंदी को फिजी में खूब सम्मान मिला . वहां के प्रधानमंत्री शिव प्रसाद, जो हिंदी के अच्छे ज्ञाता भी हैं, ने हिंदी में ही अपना भाषण दिया . वे मानते हैं कि फिजी की उन्नति में भारतीय भाषा हिंदी का विशेष योगदान है . वहां की संसद में भी हिंदी में ही भाषण दिए जाते हैं . इतना ही नहीं, फिजी में 15 फरवरी को गिरमिटिया दिवस मनाने और इस दिन शासकीय अवकाश रखने का ऐलान किया गया . फिजी में भारतीय मूल के प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि “ऐसा स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन अभी तक इस देश की धरती पर कभी नहीं हुआ” .


आचार्य वाजपेयी ने बताया कि फिजी 332 द्वीप-समूहों का एक देश है . करीब 147 वर्ष पहले अंग्रेज शासकों ने आम भारतीयों की रोजी-रोटी छीनकर उन्हें मजदूर बनाकर फिजी आदि देशों में भेज दिया था . आम भारतीय अपने साथ रामायण और गीता लेकर गए थे . वहां उन्होंने गुरुकुल की स्थापना की . उनकी अगली पीढ़ियों ने भी हिंदी में पढाई-लिखाई की . वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी भारत से जुड़े रहे . भारत की संस्कृति से जुड़े रहे . आचार्य बाजपेयी ने बताया कि आज भी भारतीय मूल के फिजी नागरिकों ने अपने पूर्वजों की स्मृतियों को सहेज कर रखा है . हिंदी भाषा को जीवित रखा है . वे रामचरितमानस पढ़ते हैं . गीता पढ़ते हैं . रामलीला और कृष्णलीला करते हैं . हम भारतीयों की तरह सारे व्रत-उपवास, तीज-त्यौहार, होली-दिवाली मनाते हैं . वहां हिंदी के जानकार बहुतायत से हैं .


उन्होंने हिंदी के वैश्विक स्वरुप को सामने रखते हुए बताया कि 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन में हिंदी-भाषी 40 देशों में से 31 देशों के करीब ढाई हजार प्रतिनिधि शामिल थे . मुख्य रूप से वहां पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर चर्चा हुई . “कंठस्थ” नाम का एक “एप” भी तैयार किया गया है जिसमें 20 लाख शब्दों का समावेश किया गया है . इससे परस्पर अनुवाद की संभावना को बल मिलेगा . अनुवाद से भिन्न-भिन्न भाषाओँ में समन्वय स्थापित होगा . उन्होंने बताया कि सिंगापुर में भी हिंदी भाषा में अनुसन्धान हो रहे हैं . मारीशस में भी हिंदी का बोलबाला है . वहां विश्व हिंदी सम्मलेन का मुख्यालय भी बनाया गया है . हिंदी में पत्र-पत्रिकाएं भी वहां छप रही हैं . लन्दन से “पुरवाई” नामक पत्रिका प्रकाशित की जा रही है . हिंदी का वैश्विक सम्मान बढ़ रहा है .
“पहुना” कार्यक्रम के आरम्भ में प्रेस क्लब के अध्यक्ष विरेन्द्र गहवई ने कुलपति आचार्य वाजपेयी का पुष्प-गुच्छ देकर स्वागत किया . बाद में उन्होंने प्रेस क्लब की ओर से आचार्य वाजपेयी को श्रीफल व शाल देकर सम्मानित किया . कार्यक्रम का संचालन प्रेस क्लब के सचिव इरशाद अली ने किया . पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रेस क्लब के प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सदस्य उपस्थित थे .

सम्पादक

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